मैं मर्द हूँ ना मैं नहीं बताऊंगा
Poet: Abhijeet
**मैं मर्द हूँ ना मैं नहीं बताऊंगा ॥॥**
मैं विघ्न - बाधाओं को अकेले पार कर जाऊंगा
झुककर ही सही हिमालय के सामने खड़ा हो जाऊंगा
खुद के सहारे का पता नहीं पर परिवार का सहारा बन जाऊंगा
मैं मर्द हूँ ना मैं नहीं बताऊंगा ॥॥
हो बारिश या आग जले कोई अपना बिछड़े या खुद की आत्मा मरे मैं सब सह जाऊंगा
साथ कोई ना चले चाहे मेरी खुशियाँ जल-जल कर मरे मैं सब झेल जाऊंगा
आँखें रोये या होठ मुस्कुराये दिल कहीं दफ्न हो जाए या परछाई कल्क हो जाए मैं सब पार कर जाऊंगा
मैं मर्द हूँ ना मैं नहीं बताऊंगा ॥॥
रोना तो सीखा ही नहीं इसलिए हंसते - हंसते सब पार कर जाऊंगा
मेरे साथ मेरी मर्दानगी है मैं कैसे कहीं झुक जाऊंगा
सह लूंगा सूर्य की तेज़ को भी कैसे माँ के आंचल में छुप जाऊंगा
मैं मर्द हूँ ना मैं नहीं बताऊंगा ॥॥
सबकी सुनऊंगा पर बिन कहे आगे बढ़ जाऊंगा
दर्द कितना भी हो मैं हंसते---हंसते मरहम दे बढ़ जाऊंगा
पूछते पूछते थक जाओगे शिकायत बिन किए चलता जाऊंगा
क्यों? क्योंकि मैं मर्द हूँ ना मैं नहीं बताऊंगा ॥॥
मैं विघ्न - बाधाओं को अकेले पार कर जाऊंगा
झुककर ही सही हिमालय के सामने खड़ा हो जाऊंगा
खुद के सहारे का पता नहीं पर परिवार का सहारा बन जाऊंगा
मैं मर्द हूँ ना मैं नहीं बताऊंगा ॥॥
हो बारिश या आग जले कोई अपना बिछड़े या खुद की आत्मा मरे मैं सब सह जाऊंगा
साथ कोई ना चले चाहे मेरी खुशियाँ जल-जल कर मरे मैं सब झेल जाऊंगा
आँखें रोये या होठ मुस्कुराये दिल कहीं दफ्न हो जाए या परछाई कल्क हो जाए मैं सब पार कर जाऊंगा
मैं मर्द हूँ ना मैं नहीं बताऊंगा ॥॥
रोना तो सीखा ही नहीं इसलिए हंसते - हंसते सब पार कर जाऊंगा
मेरे साथ मेरी मर्दानगी है मैं कैसे कहीं झुक जाऊंगा
सह लूंगा सूर्य की तेज़ को भी कैसे माँ के आंचल में छुप जाऊंगा
मैं मर्द हूँ ना मैं नहीं बताऊंगा ॥॥
सबकी सुनऊंगा पर बिन कहे आगे बढ़ जाऊंगा
दर्द कितना भी हो मैं हंसते---हंसते मरहम दे बढ़ जाऊंगा
पूछते पूछते थक जाओगे शिकायत बिन किए चलता जाऊंगा
क्यों? क्योंकि मैं मर्द हूँ ना मैं नहीं बताऊंगा ॥॥