उड़ जाने दो मुझे
Poet: Irfan Ansari
**उड़ जाने दो मुझे**
हवा के झोंकों में बह जाने दो मुझे,
इन सुर्ख रातों में खो जाने दो मुझे।
किस चाह में यूँ बेबाक़ जलती है शमा,
उस चाह की लौ मे जल जाने दो मुझे।
कितने फ़ाँसले तय कर चुका है ये कारवाँ,
थक गया हूँ, ज़रा देर ठहर जाने दो मुझे।
करूँ इंतज़ार क्यूँ मैं अपने साहिल-ए-हयात का,
इस दरिया-ए-मोहब्बत में डूब जाने दो मुझे।
दम घुट रहा है इस नशिमन में अब मेरा,
आज़ाद परिंदा हूँ उड़ जाने दो मुझे।
हवा के झोंकों में बह जाने दो मुझे,
इन सुर्ख रातों में खो जाने दो मुझे।
किस चाह में यूँ बेबाक़ जलती है शमा,
उस चाह की लौ मे जल जाने दो मुझे।
कितने फ़ाँसले तय कर चुका है ये कारवाँ,
थक गया हूँ, ज़रा देर ठहर जाने दो मुझे।
करूँ इंतज़ार क्यूँ मैं अपने साहिल-ए-हयात का,
इस दरिया-ए-मोहब्बत में डूब जाने दो मुझे।
दम घुट रहा है इस नशिमन में अब मेरा,
आज़ाद परिंदा हूँ उड़ जाने दो मुझे।