FiRST SEM KI जुगलबंदी
FiRST SEM KI जुगलबंदी
UG magazine UG magazine! हमारी Magazine छपने वाली है इस खबर ने मानो मन मे नया उत्साह भर दिया था !!!पर जैसे hindi movie में होता हैं Hero के साथ willian ‘मुफ्त ‘मुफ्त ‘मुफ्त ठीक उसी तरह इस खुश खबरी के साथ साथ एक दुविधा हौले हौले “Bangalore” कि रिमझिम बारिश की तरह नही बलिक ‘Cherapunji’ (या इतना दूर क्यो जाये) आजकल की Mumbai की बारिश की तरह आई। दुविधा क्या लिखूँ इसकी दुविधा ! और इस दुविधा की आग मे ghee डाल रहे थे कई विचार -
“IISc कि पहली UG Magazine हैं, सबकी निगाहे होंगी”
Seniors, Prof तो वैसे ही हमें ‘ Young Chimpanzees’, ‘kids’ बुलाते हैं कुछ अच्छा नहीं लिखा तो वही image बन केरह जाएगी। पर इस कशमकश के बीच भोपाली अंदाज मे मन ने कहा- “अंमा छोडो, मिया हम जो हैं सो हैं।” फिर क्या ‘Yest’ चल गया और तुरंत idea का bulb जल गया। क्यो न First Sem की दास्ताँ सुनाईजाए। पर इससे पहले मैं ‘संक्षेप’ मे अपनी बात कहुँ भारतीयो का एक गुण आपके समक्ष प्रस्तुत करना चाहूँगी। कभी आपको आपके रिश्तेदारोने मिलते हीपूछा है क्या “बेटा खेल कूद कैसा चल रहा हैं, Party sharty मस्त!!”
नही ना! सबसे पहला question अपने Ak-47 से shoot करते हैं। “पढाई कैसी चल रही है ?” तो इससे पहले आप heredity से मजबुर होके मुझसे यही प्रश्न पुछे मै पढाई ही शुरु करती हूँ। दूर के ढोल हमेशा ही सुहानें लगते हैं इसलिए दो महीने कि मस्ती और आवारागर्दी के बाद पढाई भी सुहानी लग रही थी। हम ‘SCIENCE पढ़ने वाले हैं, “आखिरऐसा क्यों होता है” इन सभी प्रश्नों के जवाब ढूँढने वाले हैं। यह सोच कर तो garden garden हो रहा था और दिमाग तो चीख रहा था “ Mugambo खुश हुआ।” Dirac, Feynman, Einstein, Schrodinger बस इन्ही कि भाषा मे बात होती। Surely you are joking Mr. Feynman कह कह कर ठहाके लगाते । वाह!! चारों ओर नही आठों ओर science थी।
” अन्त भला तो सब भला “ ऐसा सभी कहते हैं। अब यार obvious है ending अच्छी हुईतो सब अच्छा ही हैं। पर क्या किसी ने कभी कहा है, “ शुरुवात भली तो सब भला” नहीं न क्योंकि वो हमारी कथा और दशा पहले ही सुन और जान चुके थे। सुबह 8:30am से 5:00pm (officially ! { actually 6:00pm }) तक science ने दिमाग में ऐसी “हलचल” (हलचल बहुत हल्का शब्द है) ऐसा “भूकंप” मचाया की सुनामी भी उससे शर्मा जाए।
Walk करते करते सारा campus खत्म हो गया पर meditation भंग करने epsilon और delta का concept नही आया। Physics की book खोलते ही does that make any sense?? यही प्रश्न दिमाग मे घुमता रहता और बार बार जहन में एक ही ख्याल आता wait a minute. Have I done something wrong?
Gradient ने हमे physics से ऐसा divergence दिया कि हमारा दिमाग Newton और Einstein के बालों कि तरह curl हो गया।
परिस्थिति इतनी बिगड़ने के बाद भी थोडी तो आस थी कि शायद chemistry की mystery हमारे पास थी। पर भ्रम तो टूटना ही था। Schrodinger भाईसाहब ने अपना vacation मनाते मनाते खतरनाक सी equation मजे से लिख दी और अब उसके चक्करमे हमारे सारे weekend और सारे vacation से मजा उड गया। Schrodinger ने हमारे दिमाग को समझा हो या ना समझा हो Heisenberg ने यकीनन हमे पहचाना तभी तो अपने uncertainty principle मे केवल particles को ध्यान मे रखते हुए नही लिखा बल्कि abstract thoughts को भी consider किया eg: UG chemistry. “The concept and numerical of any topic in chemistry can’t be understood completely by any student. There is always an uncertainty in it.” और यही uncertainty, error analysis के through हमारे marks में carry forward हो गई। बस marks और subject देख कर इतना ही कह सकती हूँ. “ I am too lazy”.
UG course ने तो सृष्टि के नियम भी तोडे! अब वैसे तो ऋतुए आमतौर पर 20 दिन मेही बदलती हैंपर जानते हैं हमारे biology course में subject की ऋतुए 8 lectures मे ही बदल रही थी।
Darwin की दाडी नापते-नापते तो समर कब निकल गया पता ही नहीं चला। मधुमखियाँ तो मजे से अपना शहद nursery में बना रही थी पर हमारे दिमाग का दही बन रहा था। फिर ecology कि बारिश में हाथी रुपी हमारा आलस भीग कर बह गया। Plant और Animal kingdom की spring मे इतने फूल (Kingdoms)खिले कि हम ना तो सभी को गिन सके और न निहार सके। Cell biology में “ Close your eyes and take a deep breath” करके भी उसकी पतझड मे हमारे दिमाग के पेड से concept के पत्तों को झडने से हम रोक ना पाए।
Humanities subject का नाम सुनते ही सोचा था कि subject सिखाने वाला, सीखने वाले और more importantly subject तो ‘humane’ ही होगा। पहले दो का intuition तो सही था पर तीसरा तो myth ही निकला। Mohenjodaro की city necropolis’ है या ‘city of living’ ये सोचते सोचते ही हमारी सोच यकीनन मर गई!
पर सोच को जगाने ही नही अपितु उसे brush कराने engineering आया। बदलती ऋतुओं मे healthy रखने के लिए हमसे exercise भी engineering करवाता ! एक दिलासा था “Even if you fall ill I am with you” {actually-“ even if you get zero I am with you”}.
एक बात तो यकीनन सच हैं मनुष्य कभी present में नही रहता या तो past में रहता है या future के सपने बुनता है। पर यकीन नही करेंगे की अब कोई भी UG student past के बारे में नहीं सोचता !!
क्यों??
क्योंकि engineering के साथ backtracking करते करते past का पहाड खत्म हो गया लेकिन मन for loop के जंगल में भटकता रहा और हर मौड पर if else करते करते दिन रात मे बदल जाती। These study talks” will never end so if now your Indian genes are satisfied (which I think so are) I will tell you about other things in the campus.
IISc 100 successful years पूरे कर चुका है और इसका सबसे बडा प्रमाण हैं IISc के पुराने Hostel जो आज भी बाहर से (गौर कीजिए बाहर से) मजबूत दिखते हैं। हाँलाकि इन 100 वर्षों में अपने अकेलेपन को दूर करने केलिए उन्होंने cockroach, mice, lizards को अपना गहरा मित्र बना लिया हैं और अपने मित्रों को रीझाने के लिए अपनी दीवारें हरी भरी रंग-बिरंगी कर ली हैं। अब तो इनकी दोस्ती इतनी strong है की अब हमारी जरूरत भी महसुस नही होती। “मेरे पास lizards,mice है, cockroach हैं,क्या है तुम्हारे पास ।” hostel हर पल कहता है। हम एक ही उत्तर देते, “ हमारे पास patience हैं।” ( सरकार की proceedings को delay होते देखने का PATIENCE!!)। एक साल [in fact उससे ज्यादा] patiently wait करने कि कीमत (new hostels) तुम क्या जानो पुराने hostel बाबू ?
Panipat haryana से बोर होके हमारे hostel के washroom में आ गया (आखिर अपने नाम के हिसाब से उसे characteristics भी मिल गए भरपूर पानी इसलिए panipat!) और history तो history हैं! History repeats itself !! बस फिर क्या रोज morning में “Battle Of Panipat” छिड जाता exclusively titled as “BUCKET FIGHT !!!!” इस जंग को रोज जीत कर अपना जश्न mess में idli vada or upma के साथ मनाना और फिर जश्न के mood से बाहर आकर पहुँचना!
I think so अब मेरा संक्षेप “संक्षेप” बनरहा है। इससे पहलेकी आप article पढना बंद कर दे मैं इसे end करना पसंद करूंगी !! पर मैं एक सत्य आपको बताते हुए जाऊंगी-अब वैसे बचपन से optimism की बाते सुन सुन कर अब तो आप यही मानते होंगे (अगर मानते नहीं तो कम से कम जानते ही होंगे।) कि ‘Every coin has two sides’, ‘Glass is half filled rather than half empty’
तो सच ये हैंकि मैनें आपको glass half empty ही दिखाया हैं। (for a change !)
हाँ ये हो सकता है कि शुरुवात मे हम सभी UG students में से किसी ने glass half empty देखा होगा तो किसी ने half filled । पर इतना मैं sure हूँ कि जिन्होंने glass full देखा उन्होंने first sem के बाद उसे overflow किया और half empty देखने वालो ने यकीनन उसे fullकर ही लिया है।
Full /overflow किया हैं:
दोस्तों के साथ से,
नये hostel experience से,
Campus के अद्भुत atmosphere से,
Professors’ के उच्च विचारों से,
Bangalore के awesome weather से,
And more importantly SCIENCE से,
And the list continues……
…….asymptotically approaches ∞!