नकाब या ख्वाब!
Poet: Pratibha Mahale
चेहरे कितने चेहरे ! हर चेहरे पर एक नकाब हैं,
इसके पीछे हैं कोई मजबूरी या कोई ख्वाब हैं ...
हरा, नीला, काला, पीला,
जितने रंग सोच सकते हो बनाने अपना जहाँ रंग रंगीला,
जितने सुनहरे सपने सकते हो तुम बुन,
जितने मधुर गीत सकते हो तुम सुन,
जितनी गाली से नवाज सकते हो अपने दुश्मन को,
जितनी बार किसी गलती के लिए कोस सकते हो अपने मन को,
उससे कहीं ज्यादा,
मिलेंगे तुम्हे नकाब, ये हैं मेरा वादा..
चेहरे कितने चेहरे हर चेहरे पर एक नकाब हैं
इसके पीछे हैं कोई मजबूरी कोई ख्वाब है !
नकाब की भिन्नता और प्रकार,
को गिनते गिनते जाओगे तुम हार,
दिखाते है प्यार, नफरत, एतराज और कभी समर्थन,
न जाने कितने है करने को मंथन,
एक चेहरा एक नकाब,
ऐसे नहीं मिलेगें तुम्हे उदाहरण बेहिसाब,
नकाब कई एक चेहरा,
वास्तव में यहीं हैं सच गहरा,
एक नया मौका, एक नया व्यक्ति,
और एक नए नकाब से एक नई अभिव्यक्ति !
चेहरे कितने चेहरे! हर चेहरे पर एक नकाब हैं
इसके पीछे हैं कोई मजबूरी हैं या कोई ख्वाब हैं!
पर इस नकाब की आखिर वजह हैं क्या?
नकाब पहनने वाले न करेंगें ये ब्यान..
फिर बिना नकाब के चेहरे को कैसे पहचाने,
क्या ऐसा कोई चेहरा हैं ये भी कोई न जाने I
नकाब पहनने वाले से पूछा अगर,
तो उसकी हर तर्क पर कह पाओगे सिर्फ मगर,
जीवन एक दौड हैं,
सफलता पाने की होड़ हैं,
एसे में होने के लिए विजयी,
कुछ तो करना पडेगा भाई
ये शब्द करके अदा
वो कर देंगे तुम्हें विदा ......
चेहरे कितने चेहरे ! हर चेहरे पर एक नकाब हैं
इसके पीछे हैं कोई मजबूरी हैं या कोई ख्वाब हैं।
कुछ तो अपना मुख भी नही खोलेंगे,
एक शब्द भी नही बोलेंगें,
वो होंगे नकाब पहनने में निपुण,
जो हर परिस्थिति में सकते हैं नया नकाब बुन,
एक प्रश्न जो हैं इतना गहन..
आता देख लेंगें एक नया नकाब पहन,
नकाब ओह ! नकाब !
किसने? कब? कहाँ? पहना हमे भी बताइए साहब !
"ये तो हैं ग़लत",
कहकर अर्जित करते हैं भीषण प्रश्न में भी सहुलियत,
पर उनकी निगाहे,
खोलती हैं दिमाग की वो राहें,
जो चीख-चीख कर कह रही है- " बुझो तो जाने ",
फिर तुम भी लगोगे नकाब को अपनाने !
चेहरे कितने चेहरे ! हर चेहरे पर एक नकाब हैं
इसके पीछे हैं कोई मजबूरी हैं या कोई ख्वाब हैं!
नकाब के उपयोग के क्या है कारण,
ये जानने का कार्य हैं यकीनन असाधारण,
आपने अगर है ये पहेली बुझाई,
तो सचमुच आपने दुनिया को नकाब से लड़ने की युक्ति सुझाई,
पर गौर करना,
इसे प्रश्न का उत्तर तब न भरना,
जब नकाब का ताला,
रोक रहा हो उचित विचारों का उजाला,
तो सोचिए, पूछिए
और विचार कीजिए
चेहरे कितने चेहरे हर चेहरे पर एक नकाब हैं
इसके पीछे हैं कोई मजबूरी कोई ख्वाब है !
इसके पीछे हैं कोई मजबूरी या कोई ख्वाब हैं ...
हरा, नीला, काला, पीला,
जितने रंग सोच सकते हो बनाने अपना जहाँ रंग रंगीला,
जितने सुनहरे सपने सकते हो तुम बुन,
जितने मधुर गीत सकते हो तुम सुन,
जितनी गाली से नवाज सकते हो अपने दुश्मन को,
जितनी बार किसी गलती के लिए कोस सकते हो अपने मन को,
उससे कहीं ज्यादा,
मिलेंगे तुम्हे नकाब, ये हैं मेरा वादा..
चेहरे कितने चेहरे हर चेहरे पर एक नकाब हैं
इसके पीछे हैं कोई मजबूरी कोई ख्वाब है !
नकाब की भिन्नता और प्रकार,
को गिनते गिनते जाओगे तुम हार,
दिखाते है प्यार, नफरत, एतराज और कभी समर्थन,
न जाने कितने है करने को मंथन,
एक चेहरा एक नकाब,
ऐसे नहीं मिलेगें तुम्हे उदाहरण बेहिसाब,
नकाब कई एक चेहरा,
वास्तव में यहीं हैं सच गहरा,
एक नया मौका, एक नया व्यक्ति,
और एक नए नकाब से एक नई अभिव्यक्ति !
चेहरे कितने चेहरे! हर चेहरे पर एक नकाब हैं
इसके पीछे हैं कोई मजबूरी हैं या कोई ख्वाब हैं!
पर इस नकाब की आखिर वजह हैं क्या?
नकाब पहनने वाले न करेंगें ये ब्यान..
फिर बिना नकाब के चेहरे को कैसे पहचाने,
क्या ऐसा कोई चेहरा हैं ये भी कोई न जाने I
नकाब पहनने वाले से पूछा अगर,
तो उसकी हर तर्क पर कह पाओगे सिर्फ मगर,
जीवन एक दौड हैं,
सफलता पाने की होड़ हैं,
एसे में होने के लिए विजयी,
कुछ तो करना पडेगा भाई
ये शब्द करके अदा
वो कर देंगे तुम्हें विदा ......
चेहरे कितने चेहरे ! हर चेहरे पर एक नकाब हैं
इसके पीछे हैं कोई मजबूरी हैं या कोई ख्वाब हैं।
कुछ तो अपना मुख भी नही खोलेंगे,
एक शब्द भी नही बोलेंगें,
वो होंगे नकाब पहनने में निपुण,
जो हर परिस्थिति में सकते हैं नया नकाब बुन,
एक प्रश्न जो हैं इतना गहन..
आता देख लेंगें एक नया नकाब पहन,
नकाब ओह ! नकाब !
किसने? कब? कहाँ? पहना हमे भी बताइए साहब !
"ये तो हैं ग़लत",
कहकर अर्जित करते हैं भीषण प्रश्न में भी सहुलियत,
पर उनकी निगाहे,
खोलती हैं दिमाग की वो राहें,
जो चीख-चीख कर कह रही है- " बुझो तो जाने ",
फिर तुम भी लगोगे नकाब को अपनाने !
चेहरे कितने चेहरे ! हर चेहरे पर एक नकाब हैं
इसके पीछे हैं कोई मजबूरी हैं या कोई ख्वाब हैं!
नकाब के उपयोग के क्या है कारण,
ये जानने का कार्य हैं यकीनन असाधारण,
आपने अगर है ये पहेली बुझाई,
तो सचमुच आपने दुनिया को नकाब से लड़ने की युक्ति सुझाई,
पर गौर करना,
इसे प्रश्न का उत्तर तब न भरना,
जब नकाब का ताला,
रोक रहा हो उचित विचारों का उजाला,
तो सोचिए, पूछिए
और विचार कीजिए
चेहरे कितने चेहरे हर चेहरे पर एक नकाब हैं
इसके पीछे हैं कोई मजबूरी कोई ख्वाब है !