कविता - Expression, Free Verse
Poet: Parth Kalani
"Poetry is not in the words, but in the intervals between the words, in the pauses and silences." ~ Apurva Asrani (Aligarh, 2015)
हर बात जब कह चुकता है कवि
छंद में भर-भरकर,
या छोड़कर आज़ाद,
कवि के कलम से काग़ज़ पर
सब शब्दों के उतर जाने के बाद,
जो भी वो बोल सकता था,
उस सबके बोले जाने के पश्चात
वो
जो रह जाता है
अनकहा, अव्यक्त, अज्ञेय
उसी अरूप को कहते है
"कविता"
हर बात जब कह चुकता है कवि
छंद में भर-भरकर,
या छोड़कर आज़ाद,
कवि के कलम से काग़ज़ पर
सब शब्दों के उतर जाने के बाद,
जो भी वो बोल सकता था,
उस सबके बोले जाने के पश्चात
वो
जो रह जाता है
अनकहा, अव्यक्त, अज्ञेय
उसी अरूप को कहते है
"कविता"